महाराजा श्रीराम चंद्र भंज देव विश्वविद्यालय (एमएससीबीयू), पूर्व में नॉर्थ उड़ीसा विश्वविद्यालय, की स्थापना ओडिशा सरकार द्वारा १३ जुलाई १९९८ को ओडिशा विश्वविद्यालय अधिनियम, १९८९ की धारा ३२ के अंतर्गत की गई थी तथा यह १९९९ से एक संबद्धता प्रदान करने वाले (एफिलिएटिंग) विश्वविद्यालय के रूप में कार्यरत है। इसका मुख्यालय ओडिशा के जनजातीय बहुल मयूरभंज जिले के बारिपदा स्थित टकटपुर में अवस्थित है। विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं स्वदेशी ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के अंतर्गत एक बहुविषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय (मेरू) के रूप में एमएससीबीयू, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) २०२० के दृष्टिकोण के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, शैक्षणिक लचीलापन, अनुसंधान उत्कृष्टता, कौशल विकास तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष बल देते हुए अपने शैक्षणिक एवं अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र का सक्रिय रूप से रूपांतरण कर रहा है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, १९५६ की धारा २(एफ) एवं १२(बी) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त एमएससीबीयू को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) द्वारा तृतीय चक्र में ‘ए’ ग्रेड से मान्यता प्राप्त है, जिसकी वैधता १० अप्रैल २०२८ तक है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय को भारतीय विधिज्ञ परिषद (बार काउंसिल ऑफ इंडिया), राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग–दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो (यूजीसी-डीईबी) द्वारा भी मान्यता प्राप्त है। यह भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) तथा राष्ट्रमंडल विश्वविद्यालय संघ (एसीयू) का सदस्य भी है।

विश्वविद्यालय के अधीन मयूरभंज जिले में ५६ संबद्ध महाविद्यालय हैं, जिनमें २ स्वायत्त महाविद्यालय तथा १ शिक्षक शिक्षा (बी.एड.) महाविद्यालय शामिल हैं। ये महाविद्यालय स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के विभिन्न कार्यक्रम संचालित करते हैं। विश्वविद्यालय का ९८.८४ एकड़ में विस्तृत परिसर ‘श्रीराम चंद्र विहार’ के नाम से जाना जाता है, जिसका नाम दूरदर्शी शासक महाराजा श्रीराम चंद्र भंज देव (१८७१–१९१२) के सम्मान में रखा गया है। बारिपदा नगर के बाहरी क्षेत्र में स्थित इस परिसर का उद्घाटन १५ मई २००३ को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा किया गया था।

वर्तमान में एमएससीबीयू २५ विषयों में स्नातकोत्तर कार्यक्रम, २१ विषयों में डॉक्टरेट (पीएच.डी.) अनुसंधान तथा अनेक कौशल-आधारित प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करता है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय के अधीन रायरंगपुर स्थित सूचना प्रौद्योगिकी विद्यालय (स्कूल ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। २००३ में स्थापित विश्वविद्यालय के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र (सीडीओई) के माध्यम से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग–दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो (यूजीसी-डीईबी) द्वारा अनुमोदित १२ स्नातकोत्तर कार्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं। विश्वविद्यालय सेमेस्टर प्रणाली तथा विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली (सीबीसीएस) पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली का अनुसरण करता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० के अनुरूप प्रगतिशील शैक्षणिक सुधारों को निरंतर लागू कर रहा है।

विश्वविद्यालय ने अनुसंधान, नवाचार, बौद्धिक संपदा, परामर्श, इन्क्यूबेशन तथा स्टार्टअप से संबंधित व्यापक नीतियों द्वारा समर्थित एक सशक्त अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। वर्तमान में विश्वविद्यालय में ३५१ शोधार्थी पंजीकृत हैं तथा ₹२.५ करोड़ से अधिक मूल्य की प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित हो रही हैं। विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों ने १८ पेटेंट, ४७ बाह्य वित्तपोषित अनुसंधान परियोजनाएँ, ७०० से अधिक शोध प्रकाशन (जिनमें ४५० अनुक्रमित शोध-पत्र शामिल हैं) तथा ३२५ पुस्तकें एवं पुस्तक अध्याय प्रकाशित किए हैं। विश्वविद्यालय के अनुसंधान की गुणवत्ता का प्रमाण इसका औसत प्रभाव कारक (इम्पैक्ट फैक्टर) २.०२, औसत उद्धरण सूचकांक ५.७१५ तथा संस्थागत एच-इंडेक्स २८ है। ज्ञान-विनिमय एवं शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ ३१ क्रियाशील समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी स्थापित किए हैं।

विश्वविद्यालय में २००० से राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) ब्यूरो एवं स्नातकोत्तर इकाई सक्रिय रूप से कार्यरत है, जो विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता तथा सामुदायिक सेवा की भावना का विकास करती है। २०२६ से एमएससीबीयू ग्रामीण सहभागिता एवं सतत विकास पहलों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उन्नत भारत अभियान (यूबीए) का भी क्रियान्वयन कर रहा है। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के सहयोग से विश्वविद्यालय शैक्षणिक एवं क्षमता निर्माण संबंधी विविध कार्यक्रमों का सक्रिय रूप से आयोजन कर रहा है, जिनमें संगोष्ठियाँ, सम्मेलन, कार्यशालाएँ, संकाय विकास कार्यक्रम, कौशल विकास पहल तथा जन-जागरूकता अभियान शामिल हैं।